Sri Damodar Ashtakam
श्री दामोदराष्टकम् कार्तिक मास की अत्यंत पवित्र श्रीकृष्ण स्तुति श्री दामोदराष्टकम् में माता यशोदा के प्रेम से बँधे बाल गोपाल श्रीकृष्ण की मनमोहक लीलाओं का वर्णन है। इसके आठ श्लोकों में भक्त भगवान से केवल उनके चरणों का प्रेम और उनके सुंदर बाल स्वरूप का स्मरण माँगता है। # श्लोक 1 नमामीश्वरं सच्चिदानन्दरूपं लसत्कुण्डलं गोकुले भ्राजमानम्। यशोदाभियोलूखलाद्धावमानं परामृष्टमत्यन्ततो द्रुत्य गोप्या॥ हिंदी अर्थ: मैं उन परमेश्वर श्रीकृष्ण को प्रणाम करता हूँ, जिनका स्वरूप सत्, चित् और आनंदमय है। जिनके कानों में चमकते हुए कुंडल हैं और जो गोकुल में शोभायमान हैं। माता यशोदा के भय से वे ओखली से दूर भाग रहे हैं, और माता यशोदा उन्हें पकड़ने के लिए उनके पीछे दौड़ रही हैं। श्लोक 2 रुदन्तं मुहुर् नेत्रयुग्मं मृजन्तं कराम्भोजयुग्मेन सातङ्कनेत्रम्। मुहुः श्वासकम्पत्रिरेखाङ्ककण्ठ- स्थितग्रैवं दामोदरं भक्तिबद्धम्॥ हिंदी अर्थ: मैं उन दामोदर भगवान को प्रणाम करता हूँ, जो माता यशोदा से डरकर रो रहे हैं और अपने दोनों कमल जैसे हाथों से बार-बार आँखें पोंछ रहे हैं। उनके नेत्र भय से चंचल हैं, श्वास के कारण उनका श...