Sankatmochan Hanuman Ashtak || संकटमोचन हनुमानाष्टक

Sankatmochan Hanuman Ashtak || संकटमोचन हनुमानाष्टक 



हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है। मान्यता है कि हनुमान जी की कृपा से सभी तरह के संकट पल भर में दूर हो जाते हैं। बड़े-बड़े पर्वत उठाने वाले, समुद्र लांघ जाने वाले, स्वयं ईश्वर का कार्य संवारने वाले संकटमोचन हनुमान की विधि पूर्वक पूजा करने से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।



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लाभ:

☆○☆ संकटमोचन हनुमान अष्टक के पाठ से मन और शरीर के सभी प्रकार के संकट दूर हो सकते हैं। हनुमान जी की कृपा से आपको विपत्तियों और आपत्तियों से बचने की शक्ति प्राप्त होती है।



Sankatmochan Hanuman Ashtak || संकटमोचन हनुमानाष्टक



1. बाल समय रवि भक्षि लियो तब, तीनहुँ लोक भयो अँधियारो ।

ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सो जात न टारो ।

देवन आनि करी बिनती तब, छांडि दियो रवि कष्ट निवारो ।

को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ।


हे हनुमान जी ! आपने अपने बाल्यावस्था में सूर्य को मुँह में रख लिया था जिससे तीनों लोक में अंधकार फ़ैल गया और सारे संसार में भय व्याप्त हो गया। इस संकट का किसी के पास कोई समाधान नहीं था। तब देवताओं ने आपसे प्रार्थना की और आपने सूर्य को मुक्त कर दिया और इस प्रकार संकट दूर हुआ। हे हनुमान जी ! संसार में ऐसा कौन है जो आपके 'संकटमोचन' नाम को नहीं जानता।



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हनुमान जी ने बचपन में सूर्य को निगल लिया था, जिस के कारण सारी सृष्टि और देवता दुखी हो गए थे, तब रवि को छोड़कर सबका दुःख दूर किया और अमित विक्रम/ संकटमोचन कहलाये!!





2.

बालि की त्रास कपीस बसै गिरि , जात महाप्रभु पंथ निहारो।
चौंकि महामुनि साप दियो तब, चाहिय कौन बिचार बिचारों॥
कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के सोक निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो ॥

हे हनुमान जी! बालि के डर से सुग्रीव ऋष्यमूक पर्वत पर रहते थे। एक दिन सुग्रीव ने जब राम- लक्ष्मण को वहां से जाते देखा तो उन्हें बालि का भेजा हुआ योद्धा समझ कर भयभीत हो गए। उसने आपको ब्राह्मण का वेश धारण करके भगवान के पास जाने को कहा। ऋषि ने चौंककर श्राप दिया था कि जब तक आपको अपनी शक्तियों का स्मरण न कराया जाए वे शक्तियां विस्मृत रहेंगी। तब हे हनुमान जी! आपने ब्राह्मण का वेश धारण करके प्रभु श्रीराम का भेद जाना और सुग्रीव से उनकी मित्रता कराई। इस प्रकार आपने भक्त के संकट दूर किए। हे कपि, संसार में ऐसा कौन है जो आपके 'संकटमोचन' नाम को नहीं जानता।


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बालि के डर से सुग्रीव को मुक्त किया और महाबली / संकटमोचन  कहलाये!!




3. 
अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो ।
जीवत ना बचिहौ हम सों जु, बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो ।
हेरि थके तट सिंधु सबै तब, लाय सिया-सुधि प्रान उबारो ।।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो ॥


हे उदद्यिक्रमण ! सुग्रीव ने आपको अंगद आदि वानरों के साथ सीता माता की खोज में भेजा तब उन्होंने कहा था कि जो भी बिना सीता माता का पता लगाए यहाँ आएगा उसे मैं प्राणदंड दूंगा। जब सारे वानर सीता को ढूँढ़ते - ढूँढ़ते थक कर और निराश होकर समुद्र तट पर बैठे थे , तब आप ही ने विशाल समुद्र लाँघकर और लंका जाकर माता सीता का पता लगाया जिससे सब के प्राण बच गये। हे कपि, संसार में ऐसा कौन है जो आपके 'संकटमोचन' नाम को नहीं जानता।



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सुग्रीव के डर से अंगद आदि वानरों को मुक्त किया, समुद्र पार जाकर सीता माता का पता लगाया और उदद्यिक्रमण / संकटमोचन कहलाये!!







4.

 रावण त्रास दई सिय को सब, राक्षसि सों कहि सोक निवारो ।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाय महा रजनीचर मरो ।
चाहत सीय असोक सो आगिसु, दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो ॥

हे सीता शोक विनाशन ! अशोक वाटिका मे रावण ने सीता जी को कष्ट दिया, भय दिखाया और सभी राक्षसियों से कहा कि वे सीताजी को मनाएं, तब उसी समय आपने वहाँ पहुँचकर वीर राक्षसों का संहार कर दिया। जब सीता माता दुखी होकर अशोक वृक्ष से अपनी चिता के लिए आग मांग रही थी तब आपने श्री राम जी की अंगूठी देकर माता सीता के दुखों का निवारण कर दिया। हे कपि! संसार में ऐसा कौन है जो आपके संकटमोचन नाम को नहीं जानता।


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हनुमान जी ने सीता माता को खोज कर राम जी का, और राम जी की मुद्रिका देकर सीता माता का दुःख दूर किया और सीता शोक विनाशन/संकटमोचन कहलाये!! 





5. 
बान लग्यो उर लछिमन के तब, प्रान तजे सुत रावन मारो ।
लै गृह बैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोन सु बीर उपारो ।
आनि सजीवन हाथ दई तब, लछिमन के तुम प्रान उबारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो ॥

हे लक्ष्मण प्राण दाता ! जब मेघनाद ने लक्ष्मण पर शक्ति का प्रहार किया और लक्ष्मण मूर्छित हो गए तब हे हनुमान जी , आप ही लंका से सुषेण वैद्य को घर सहित उठा लाए और उनके परामर्श पर द्रोणागिरी पर्वत उखाड़कर संजीवनी बूटी लाकर दी और लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा की। हे कपि ! संसार में ऐसा कौन है जो आपके 'संकटमोचन' नाम को नहीं जानता।



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हनुमान जी ने लक्ष्मण के प्राण बचा कर राम जी का दुःख दूर किया और लक्ष्मण प्राण दाता / संकटमोचन कहलाये!!






6. रावन युद्ध अजान कियो तब, नाग कि फांस सबै सिर डारो ।
श्री रघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो ।
आनि खगेस तबै हनुमान जु, बन्धन काटि सुत्रास निवारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो ॥


हे दशग्रीव दर्पहा! अज्ञानतावश भीषण युद्ध करते हुए रावण ने भगवान श्री राम और लक्ष्मण सहित सभी योद्धाओं को नाग पाश में जकड़ लिया । श्री राम सहित समस्त वानर सेना संकट मे घिर गई, तब आपने ही गरुड़ देव को लाकर सभी को नागपाश से मुक्त कराया। 
हे कपि ! संसार में ऐसा कौन है जो आपके 'संकटमोचन' नाम को नहीं जानता।




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हनुमान जी ने सारी सेना को रावण के नाग पाश से मुक्त कराया और सभी के प्राण बचा कर संकटमोचन कहलाये!!



7. बंधु समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पाताल सिधारो ।
देवहिं पूजि भलि विधि सों बलि, देउ सबै मिलि मंत्र बिचारो ।
जाय सहाय भयो तब ही, अहिरावन सैन्य समेत संहारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो ॥


हे प्रभु! जब अहिरावण छल से श्री रघुनाथ जी को लक्ष्मण सहित अपहरण करके पाताल लोक ले गया और देवी की भलीभांति पूजा करके सबके परामर्श से यह उनकी बलि देने का निश्चय किया , तब हे हनुमान जी ! आपने वहाँ पहुँच कर अहिरावण का सेना सहित संहार किया। हे कपि ! संसार में ऐसा कौन है जो आपके 'संकटमोचन' नाम को नहीं जानता।


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हनुमान जी ने अहिरावण का सेना सहित संहार किया और राम- लक्ष्मण को कैद मुक्त कराया । राम- लक्ष्मण के प्राण बचा कर 'संकटमोचन' कहलाये!!



8. काज किये बड़ देवन के तुम, बीर महाप्रभु देखि बिचारो ।
कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसों नहिं जात है टारो ।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होय हमारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो ॥

हे हनुमान जी!आपने देवताओं के बड़े - बड़े काम किये हैं। आप विचार के देखिये कि मुझ गरीब पर ऐसा कौन सा संकट आ गया है जिसे 'आप' दूर नहीं कर सकते। हे महाप्रभु ! आप जल्दी से मेरे सभी संकटों का निवारण कर दीजिए। हे कपि ! संसार में ऐसा कौन है जो आपके 'संकटमोचन' नाम को नहीं जानता।


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हनुमान जी देवताओं के बड़े- बड़े काम संवार कर 'संकटमोचन' कहलाये!! कृपया हमारे भी संकट दूर कर दीजिए!!





9. लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लँगूर ।

बज्र देह दानवदलन, जय जय जय कपि सूर । ।

हे हनुमान जी, आपके शरीर और लंबी पूंछ पर लाल सिंदूर शोभायमान है। आपके वस्त्र भी लाल है।  आपका वज्र के समान शरीर दानवों का नाश करने वाला  है। हे प्रभु ! आपकी जय हो, जय हो, जय हो।



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हे संकटमोचन ! आपकी सदा ही जय हो।






।। इति श्री संकटमोचन हनुमानाष्टक संपूर्ण ।।




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बाल समय रवि भक्षि लियो तब, तीनहुँ लोक भयो अँधियारो । ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सो जात न टारो । देवन आनि करी बिनती तब, छांडि दियो रवि कष्ट निवारो । को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो । को- 1








बालि की त्रास कपीस बसै,  गिरि जात महाप्रभु पंथ निहारो।  चौंकि महामुनि शाप दियो तब,  चाहिए कौन विचार बिचारो॥  कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु,  सो तुम दास के शोक निवारो।  को नहिं जानत है जग में कपि,  संकट मोचन नाम तिहारो ॥२॥




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अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो । जीवत ना बचिहौ हम सों जु, बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो । हेरि थके तट सिंधु सबै तब, लाय सिया-सुधि प्रान उबारो ।। को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो ॥









रावण त्रास दई सिय को सब, राक्षसि सों कहि सोक निवारो । ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाय महा रजनीचर मरो । चाहत सीय असोक सो आगिसु, दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो । को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो ॥




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लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लँगूर । बज्र देह दानवदलन, जय जय जय कपि सूर । ।






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।। इति श्री संकटमोचन हनुमानाष्टक संपूर्ण ।।

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